रॉबर्ट इंगरसोल, 1882
इस दुनिया के लिए एक आस्था-वाक्य
उन्नीसवीं सदी के अमेरिका का सबसे मशहूर वक्ता, एक ही जीवन को पूरी तरह जीने की दलील देकर थिएटर भर देता था। उसका सार:
सुख ही एकमात्र भलाई है। सुखी होने का समय अभी है। सुखी होने की जगह यहीं है। सुखी होने का तरीक़ा दूसरों को सुखी करना है।
मदद करने वाले हाथ, प्रार्थना करने वाले होंठों से कहीं बेहतर हैं। श्रम ही वह अकेली प्रार्थना है, जिसका प्रकृति उत्तर देती है।
मैं वहाँ जीना और प्रेम करना पसंद करूँगा जहाँ मृत्यु राजा है, बनिस्बत उस अनंत जीवन के जहाँ प्रेम नहीं है।
न्याय को अपनी आँखों की पट्टी इतनी देर के लिए हटा लेनी चाहिए कि वह दुष्ट और अभागे में फ़र्क़ कर सके।
अंतरात्मा के बिना साहस एक जंगली जानवर है; साहस के बिना अंतरात्मा कायरता है। लेकिन दोनों साथ — वही एक पूरा इंसान है।