यहीं जियो, अभी जियो
मनुष्य के जीवन में लगभग 4,000 सप्ताह होते हैं। नीचे की पंक्ति उसने लिखी जो यह समझता था। इसे पढ़ें, फिर मुख्य पृष्ठ पर अपने सप्ताह गिनें।
“भीतर खोदो। भलाई का सोता भीतर ही है।”
मार्कस ऑरेलियस, लगभग 170
“प्रकृति को हमारे भय की आवश्यकता नहीं।”
लुक्रेशियस, लगभग 55 ई.पू.