यहीं जियो, अभी जियो
मनुष्य के जीवन में लगभग 4,000 सप्ताह होते हैं। नीचे की पंक्ति उसने लिखी जो यह समझता था। इसे पढ़ें, फिर मुख्य पृष्ठ पर अपने सप्ताह गिनें।
“जितने ऊँचे हों, उतनी विनम्रता से चलें।”
सिसरो, लगभग 45 ई.पू.
“समय-समय पर, जिन बातों को स्वीकार कर बैठे हैं, उन पर प्रश्नचिह्न टाँगना स्वास्थ्यकर है।”
बर्ट्रेंड रसेल, लगभग 1950