यहीं जियो, अभी जियो
मनुष्य के जीवन में लगभग 4,000 सप्ताह होते हैं। नीचे की पंक्ति उसने लिखी जो यह समझता था। इसे पढ़ें, फिर मुख्य पृष्ठ पर अपने सप्ताह गिनें।
“सुख — किसी और जगह नहीं इसी जगह, किसी और घड़ी नहीं इसी घड़ी।”
व्हिटमैन, 1856
“मैं विशाल हूँ, मुझमें अनेक समाए हैं।”
व्हिटमैन, 1855